
बुढ़ापे में नेकी क्यों
जवानी में इंसान अपनी दुनिया में रहता है पैसा कमाव और मस्त रहो आखरत का खाया भी अपने मन में नहीं लाता, जब बुढ़ापा आता है तब नेकी के तरफ कदम बढ़ता है
क्यों ?
जवानी समुंदर के लहरों की तरह होती है कब आई कब गई पता भी नहीं चलता।
बुढ़ापे के अन्दर जालिम भेड़िया परेजगार हो जाता है क्या उस के हाथो में एखलाक का फाशिला बन गया की वह चिर फार नहीं कर सकती, नहीं बुढ़ापे का आलम कुछ ऐसा होता है बुढ़ापे के अन्दर जालिम भेड़िया भी परेजगार हो जाता है

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